शिक्षक और शिक्षक दिवस की सार्थकता

Teacher and Teacher's Day meaningful
शिक्षक और शिक्षक दिवस की सार्थकता 
 
कोई भी शिक्षक अपने छात्रो को तब तक प्रोत्साहित नही कर सकता,  जब तक वह स्वयं  अपने ज्ञान का विस्तार करने मे सक्षम नही होता। एक विद्यालय की प्रतिष्ठा उसके शिक्षको से होती है । शिक्षक दिवस के मौके पर हम अपने शिक्षको को सामुहिक रूप से सम्मानित करते है । वास्तव मे शिक्षको का स्थान  समाज मे सर्वोपरि है । ऐसे मे शिक्षको की जवाबदेही बनती है कि अपने छात्रों को शिक्षित व ज्ञान से परिपूर्ण कर ऐसा मनुष्य बनाये जो अपने साथ समाज और देश का भी भला करने मे सक्षम हो । पर कुछ शिक्षक ऐसे भी है जो  अध्यापन पर ध्यान नही देते और छात्रो मे बौद्धिक और नैतिक विकास को लेकर उदासीन रवैय्या रखते है । विद्यालय प्रशासन  मे रसूख पाने की इच्छा रखने वाले ये शिक्षक गुटबाजी करके तरह तरह के षडयंत्र रचते है । सरकार ऐसे उपायो पर विचार कर रही है ताकि विद्यालयों की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके । केवल शिक्षको के वेतन सुधारने से कुछ नही होगा। सावधानी के साथ विद्यालयों और विश्वविद्यालयों  मे शिक्षको का चयन किया जाना चाहिए । हम शिक्षको से यही उम्मीद करते है कि वे अपने छात्रो को ऐसे नागरिक बनाये जो घृणा, द्वेष,  आलस्य, अविश्वास और अहंकार की भावना से दूर हो । जो व्यक्तिगत न होकर राष्ट्र और मनुष्य की सेवा के लिए तत्पर हो। तभी शिक्षक और शिक्षक दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी।
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