बीमार पड़ा तंत्र -स्वछता अभियानो की असफलता

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बीमार पड़ा तंत्र 
 
देश मे चल रहे स्वछता अभियानो की असफलता का एक बडा उदाहरण देश तेजी से फैलता डेंगू,  मलेरिया व चिकनगुनिया है । जिनकी वजह से लोगो की जाने जा रही है। गांव तथा शहरो की साफ सफाई, मच्छर व बीमारी फैलाने वाले कारको से मुक्त रखना स्थानीय  निकायो की जिम्मेदारी होती है । लेकिन इनके काम करने के हालात ऐसे है कि केन्द्र सरकार को स्वयं स्वच्छ भारत जैसे अभियान चलाने पङ रहे है । काम मे लापरवाही व अकर्मणयता के चलते ये रोग फैलते है । राष्ट्रीय स्तर पर चाहे स्वछता का कोई भी मिशन चल रहा हो पर इसकी सफलता व असफलता स्थानीय लोगो, संगठनों व् संस्थायों के सहयोग पर ही निर्भर करती है । इस साल बारिश भी खूब हुई जिसके चलते नालो, नालियो व गढढो मे भरे पानी को निकालने की कोई व्यवस्था हमारे यहा नही है । इन्ही मे बीमारी फैलाने वाले मच्छर पनप रहे है । जिससे न केवल बीमारीया फैल रही है बल्कि महामारी का रूप धारण कर रही है । जब यह स्थिति उत्पन्न होती है तो दूसरे स्तर की लापरवाही और नाकारापन भी हमारे समाने आते है । हमारी व्यवस्था जितनी रोगो के रोकथाम मे नाकाम साबित होती है । उससे कही ज्यादा वह रोगो के उपचार मे नाकाम साबित होती है । जहाँ दुनिया भर मे डेंगू व चिकनगुनिया को ऐसी बीमारी माना जाता है जिसमे मरीज को जान का खतरा नही होता। वही भारत मे बदइंतजामी के कारण यही रोग महामारी बन जाता है । सभी लोगो तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का संकल्प अक्सर सुनने मे आता है । लेकिन यह सपना कब जमीनी हकीकत बनेगा इस पर अभी कुछ नही कहा जा सकता । जब पूरा तन्त्र ही बीमार हो तो उससे उपचार की आशा भी क्या की जा सकती है । 
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