गणेशोत्सव – श्री गणेश का अवतरण

Ganesha ekadant legend,श्री गणेश एकदंत कथा
गणेशोत्सव – श्री गणेश का अवतरण 
 
शिवपुराण में भाद्रपद मास की चतुर्थी को मंगलमूर्ति गणेश की अवतरण-तिथि बताया गया है ! इस पावन अवसर पर प्रत्येक वर्ष गणेशोत्सव मनाया जाता है! गणेशोत्सव हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की सबसे अधिक धूम देखने को मिलती है। यह त्यौहार पूरे 10 दिनों तक बड़े धूम- धाम से मनाया जाता है इसके बाद गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। जब महादेव शिव और उनकी अर्धांगनी शक्ति सवरूपI देवी माता पार्वती की संतान के रूप मे गजानन  का अवतरण हुआ तो इसके पीछे एक उदेश्य यह था कि मानव जीवन मे जब भी मन और बुद्धि को लेकर असमंजस उतपन्न होगा। जब भी सत्य, मन और शक्ति का असंतुलन होगा और मानव जीवन मे बाधएँ आयंगी । तो  उनके निरवारण का उत्तरदायित्व भगवान श्री  गणेश पर होगा । आध्यात्म मे मनुष्य की बुद्धि और भावना दोनो मे सामनजस्य  को महत्व दिया गया है । क्योंकि मनुष्य की भावनाये सत्य से पार जाने का प्रयास नही करती। मनुष्य भावनाओ मे इस तरह जकङा हुआ होता है की वह सत्य को देख कर भी अनजान बना रहना चाहता है । जबकि मनुष्य की बुद्धि समय के अनुसार शक्ति का प्रयोग कर नकारात्मक प्रवत्तियो के अंत हेतु प्रयास करती है।। भगवान गणेश अपने भक्तो की समस्याओ का नाश करने वाले है। इसलिए भगवान गणेश विघ्नहर्ता के नाम से विख्यात है । भगवान गणेश अपने भक्तो को मानसिक एकाग्रता और शान्ति प्रदान करते है । । श्री गणेश का  विशिष्ट स्वरुप हमे अपने व्यक्तित्व मे सुधार की प्रेरणा  देता है । भगवन श्री गणेश के दो दांत   है । एक अखंड दूसरा खंडित । अखंड दात श्रद्धा का प्रतिक है और खंडित बुद्धि का । अर्थात एक बार बुद्धि भले ही डगमगा जाये पर श्रद्धा न डगमगाने पाये। गणेश जी की सुक्ष्म आंख  जीवन मे सुक्ष्म दृष्टि रखने की प्रेरणा  देती है । उनकी लम्बी सूड यह सन्देश  देती है कि समस्या को दूर से ही सूंघ लेने की सामर्थ्य होनी चाहिए ।   आज भी किसी भी काम का प्रारम्भ श्री गणेश की स्तुति किये बिना नहीं होता ! विघ्नहर्ता श्री गणेश सबका मंगल करने वाले है! 
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