दाल जमाखोरों के बुरे दिन

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दाल जमाखोरों के बुरे दिन 
 
मोदी सरकार में दालों के मंहगे दामों की वजह से पिछले एक साल से जनता रो रही है! दालो की  जमाखोरी  की वजह से मोदी सरकार का भी बहुत नुकसान हो रहा है!  जमाखोरों ने दालों को सस्ते दामों में  खरीदकर जमा कर लिया है और अब मनचाही कीमतों पर बेच रहे हैं।  मोदी सरकार को सबसे अधिक नुकसान बिहार चुनावों में हुआ! विरोधियों ने मोदी सरकार की जमकर फजीहत की! दालों के दाम को 200 रुपये बता बता कर मोदी सरकार की जमकर धुलाई की! नतीजा यह हुआ कि बीजेपी बिहार चुनाव हार गयी और उत्तर प्रदेश में भी नुकसान होना तय है।  लकिन  अब दाल जमाखोरों की मुसीबत बढ़ने वाली है क्योंकि मोदी सरकार ने दाल के बफर स्टॉक को बढ़ाकर 20 लाख टन करने को मंजूरी दे दी। सस्ते दाम पर दालों की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने दालों का बफर स्टॉक बनाया है। दाल में लगी महंगाई की आग खत्म करने के लिए सरकार ने रिटेलर्स को भी कड़ी चेतावनी दी है  कि अगर थोक बाजार के मुकाबले रिटेल में दाल के दाम ज्यादा बढ़े तो सरकार खुद कदम उठाएंगी। दालों की कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से सरकार देश में दालों की खरीद बढ़ाएगी। इसके साथ ही दालों की पर्याप्त सप्लाई रखने के लिए इम्पोर्ट भी किया जाएगा। सरकार द्वारा दालो के बफर स्टॉक बढ़ाने के फैसले से अब दाल जमाखोरों के बुरे दिन शुरू होने वाले है! 
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