गुरु का स्थान

Guru Purnima 2016 Thoughts in Hindi
हिन्दूओ मे गुरु का स्थान  
 
गुरु का महत्व आदि काल से चला आ रहा है । मनुष्य जीवन के हर पहलू मे गुरुओ का का विशेष स्थान रहा है । हिन्दूओ मे गुरुओ को अत्यधिक सम्मान के साथ पूजा जाता है । हिन्दूओ मे भगवान ने बाद दूसरा स्थान गुरु को प्राप्त है । जीवन मे गुरु ही सही गलत की पहचान करा कर हमारा उचित समय पर उचित मार्गदर्शन करते है । हिन्दू ग्रन्थ रामायण और महाभारत मे गुरुओ की महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है । उनके संम्मान मे शिक्षक अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देने के लिए सदैव तत्पर रहते थे । एकलव्य इस कथन का उत्तम उदाहरण है जिसने अपने गुरु को गुरु दक्षिणा देने के लिए उनकी इच्छानुसार अपने हाथ का अंगूठा काट कर दे दिया था । भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में स्वयं  अर्जुन के धर्म गुरु की भूमिका निभाई थी । और उनका सत्य  का मार्ग प्रशस्त किया था।  जीवन मे कला, साहित्य, सगीत की शिक्षा हमे गुरु से प्राप्त होती है । विधालय मे शिक्षण और खेलकूद की शिक्षा हमे शिषक रूपी गुरु देते है । आजकल गुरु दिक्षा प्राप्त कर लोग प्रवचनों के माध्यम से अपने अपने गुरु से जुडे रहते है । और उनके ज्ञान के अनमोल वचनो से अपने जीवन को सही दिशा देने मे समर्थ बनते है । यधपि कलयुग मे कुछ एक गुरु के कारण गुरुओ की छवि धूमिल हुई है । शिक्षा का होता व्यवसायीकरण भी इसका एक कारण है । लेकिन गुरु शब्द को शर्मसार करने वाले इन गिनती के नामो के कारण हिन्दुओ मे गुरु का  महत्व कभी कम नही हुआ है और न कभी होगा ! 
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