भारत जैसी आजादी और कहीँ मिल ही नही सकती

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पीठ मे छुरा घोपने की आदत पुरानी
 
पाकिस्तान को इस समय गंभीर आत्मचिंतन की जरूरत है । यह नामुमकिन  नहीं  है कि बांग्लादेश की तरह बलूचिस्तान भी पाकिस्तान के खूनी शिकंजे से मुक्त हो जाए। पाकिस्तान की नियत  तो बलूचिस्तान को परदेसियो के यहा गिरवी रखने की है। पूरा बलूचिस्तान पाकिस्तान की इस दो मुँहे  सर्प के सामान  उगलते जहर से आहत हो चुका है । इसलिए जब सवतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन किया तो बलोचि गदगद हो उठे। पाकिस्तान, विभाजन के समय से ही कश्मीर को कब्जाने और वहाँ  तहस नहस करने मे लगा हुआ है । अलगाव की ये कोशिशे मौहम्मद अली  जिन्ना  के समय से हो रही है । जिन्ना  की कार्यप्रणाली विरोधाभासी थी।  स्वतंत्र बलूचिस्तान बनाने के लिए जिन्ना ने उस समय वहाँ  के नवाब से मोटी रकम वसूली थी। जिन्ना  की कोशिशो का ही नतीजा था कि पाकिस्तान के उदय से तीन दिन पहले ही अग्रेजी हुकूमत द्वारा  बलूचिस्तान को  स्वतंत्र देश घोषित किया गया । इसके बाद बलूचिस्तान  की पीठ पर छुरा घोप कर जिन्ना ने कुछ दिन बाद ही इसकी आजादी छीन ली ।  बलूचिस्तान की गुलामी की ये पटकथा जिन्ना के  हाथो लिखी गयी है ।  पाकिस्तान ने हैदराबाद व जूनागढ पर भी बन्दुक के बल पर कब्जा करने की कोशिशें की थी। इस्लाम  के नाम पर अलग देश बनाने का जिन्ना  का सपना पूरा हुआ था  । जिन्ना  के नापाक इरादो का भुगतान कशमीर और बलूचिस्तान आज भी भुगत रहा है। पीठ मे छुरा घोपने की आदत इनके खून  मे है । लेकिन  भारत भी उसी समय से अपने कशमीर बंधुओ के लिए हर परिस्थिति मे खङा रहा है। आम कशमीरी हमेशा से भारत के साथ रहा है, और रहेगा । क्योंकि भारत जैसी आजादी और कहीँ  मिल ही नही सकती।
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