डर के साये मे रैन बसेरे

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डर के साये  मे रैन बसेरे 
 
राजधानी के रैन बसेरो की स्तिथि इतनी खराब है कि बेघर महिलाये इन रैन बसेरो मे रहना ही नही चाहती । शायद उनके मुताबिक सडक पर रहना रैन बसेरो मे रहने से ज्यादा बेहतर होगा । इन रैन बसेरो की दशा कितनी भयानक है इस बात का अंदाजा  इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छः महीने की पङताल मे पता चला है कि इन रैन बसेरो मे महिलायो के साथ दुष्कर्म किया गया । यहाँ  कोई भी बाहरी व्यक्ति आसानी से  प्रवेश कर जाता है । रैन बसेरो मे न दरवाजे है और न ही बाथरूम मे कुडिया। रैन बसेरो के बाहर पुरुषो का जमावङा देखा जा सकता है । नशेङी भी इन रैन बसेरो का जबरन इसतमाल करते है ।  रैन बसेरो में सफाई और पिने के पानी की स्थिति भी खराब है!  महिला व पुरुष रैन बसेरो के एक ही परिसर मे होने से भी समस्या बनी रहती है । जांच मे पता चला जिन महिलाओ के  साथ रैन बसेरो मे छेड छाङ और दुष्कर्म किया गया इनमे से कुछ ने तो शिकायत भी दर्ज नही करायी थी । इनकी व्यथा  सुनने वाला कोई नही है । सरकार को इस अतिसंवेदनशील मुद्दे पर कदम उठाना चाहिए । रैन बसेरो मे डर के साये मे जीने वाली इन महिलायो को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए । उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन और सरकार दोनो को मिल कर काम करना होगा । इन रैन बसेरो की सुरक्षा वयवस्था बढाने के साथ, समय समय पर निरिक्षण, सुरक्षा गार्ड की तैनाती प्रमुख है। ताकि महिलाये इन शेल्टर होमस मे डर मुक्त होकर शांति पूर्वक रह सके । 
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