नरसिंह पर प्रतिबन्ध

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नरसिंह पर प्रतिबन्ध 
 
एक तरफ देश को साक्षी मलिक और पी वी सिन्धु के जितने की खुशी है । और दूसरी तरफ नरसिंह यादव के प्रतिबन्धित दवायो के मामले मे फंस कर ओलम्पिक से बाहर हो जाने का गम। इस फैसले के साथ साथ उनका खेल कैरियर भी ख्त्म हो गया है । भारतीय संस्था नाडा द्वारा दी गई क्लीन चिट को गलत करार देते हुए वाडा के सख्त फैसले से नरसिंह और भारतीय खेल प्रेमियो को बङा झटका लगा है । नरसिंह का इस हादसे से उबर पाना मुश्किल होगा । वह पिछले कुछ महीनो से तनाव मे जी रहे है । नाडा के अनुसार नरसिंह ने जानबूझकर प्रतिबन्धित  दवाओ का सेवन नही किया था। उन्हे ओलंपिक से बाहर करने के लिए षड्यंत्र के तहत वह दवाईया किसी चीज मे मिला कर दी गई थी । लेकिन अंतरराष्ट्रीय  संस्था  वाडा ने नाडा दवरा प्रस्तुत षड्यंत्र की दलीलो को नकार दिया । नरसिंह यादव के प्रति हमारा और अंतरराष्ट्रीय  संस्था वाडा का नजरिया अलग अलग होना स्वाभाविक सी बात है! पर यह भी सच है कि इस मामले मे गम्भीरता से फैलना लेने मे देश के खेल तंत्र ने लापरवाही बरती है। और जिस तरिके से नरसिंह के बचाव मे नाडा की लापरवाही सामने आयी है । उससे नाडा की  साख पर भी नकारात्मक प्रभाव पडा है । इस मामले मे दोनो ही नजरिए से देश की छवि को नुकसान पहुंचा है! नरसिंह अगर अपनी बेगुनाही  सबित करना चाहते  है  तो उन्हे सबूतों के अधार पर साबित  करना होगi कि वह  निर्दोष है! तकि वह अगले  ओलम्पिक मे सम्मान के साथ भाग ले सके ! 
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