मजदूर संघटनो की हङताल के मायने

मजदूर संघटनो की हङताल के मायने revoiceindia
मजदूर संघटनो की हङताल के मायने 
 
केन्द्र सरकार की तमाम कोशिशो के बावजूद भी 2 सितंबर को देश भर के मजदूर संघटनो की हङताल  है। बीते समय में सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढाने और केन्द्रीय कर्मचारियों  को बोनस देने जैसी तमाम घोषणाये की है । मजदूर संघटनो की कई मांग जायज भी है । पर कुछ मांगे अव्यवहारिक  भी है। उनकी इस अव्यवहारिक मांग  मे रक्षा व बीमा क्षेत्रो मे एफडीआई का विरोध है। मजदूर संघटनो को डर है कि एफडीआई के आने के बाद इन क्षेत्रो मे काम करने वाले मजदूरो और कर्मचारियों की नौकरीया खतरे मे पङ जायेगी। देश में  एफडीआई का आना व्यापक आर्थिक नजरिए का हिस्सा है । और इसके बिना ये क्षेत्र पिछङ जायेगे। अगर विदेशी पूँजी निवेश से रक्षा व अन्य क्षेत्रो का उत्पादन बढाया जाये, तो विदेशो पर हमारी निर्भरता घटेगी!  रोजगार के अवसर बढगे। इसलिए ऐसे नीतिगत बदलावो को रोकने की कोशिशें बेकार है! पर इसका मतलब यह नही है कि इन संघटनो  की सभी मांगे अव्यवहारिक है । कुछ मांगे  देश के कमजोर आर्थिक वर्गो की बेहतरी के लिए है। जिन पर अवश्य  ध्यान दिया जाना चाहिए । देश मे नई अर्थवयवस्था स्थान  ले रही है। लेकिन इससे मजदूर वर्ग के लिए अनेक नये संकट भी पैदा हुए है। इस हङताल से कोई समस्या हल होगी, इसकी उम्मीद कम है । लकिन समाजिक सुरक्षा के लिए मजदूर संघटनो व सरकार को मिल बैठकर उपाय करने चाहिए । 
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