जेल मे रोटिया तो मिलती है

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जेल मे रोटिया तो मिलती है  
 
बाहर मिले न मिले, जेल के अंदर कम से कम रोटी मिलने की गारंटी होती है । कुछ लोग तो सिर्फ इसलिए जेल चले जाते है कि कम से कम उन्हें दो वक्त की रोटी तो नसीब होगी। बड़ी जेलो  मे हर रोज हजारो की संख्या मे रोटी बचती है । जेल का स्टोर बची हुई रोटियो से भरा रहता है । और महिने के अंत मे इन सूखी बची हुई रोटियो को नीलाम कर दिया जाता है! अब तो इसमे भी घोटाला होने लगा है । लोग घोटालो मे फंस कर जेल जाते है । तो फिर जेल मे ही रोटियो के घोटाले करने वाले कहाँ जायेगे। कई खतरनाक और कुख्यात अपराधी भी सिर्फ इसलिए जेल चले जाते है, क्योंकि बाहर के मुकाबले जेल के अंदर  उनका जीवन ज्यादा सुरक्षित रहता है । इन सब बातो से ऐसा लग रहा है जैसे जेल, जेल न होकर धर्मशाला हो । पर क्या करे भारत जैसे गरीब देश मे जहाँ अरबो की संख्या मे आबादी हो, बेरोजगारी हो, भुखमरी हो, वहाँ जनता को पेट की आग बुझाने के लिए हाथ पैर मारने ही पङते है । अब चाहे तरीका गलत हो या सही,  गरीबी और पेट की आग मे इंसान कुछ भी करने को तैयार हो जाता है, चाहे वो जेल जाना ही क्यों न हो। जेल में कम से कम उन्हें खाने को रोटी और रहने को सुरक्षित  जगह  तो मिलती है!  
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