जगन्नाथ पुरी की आलौकिकता

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जगन्नाथ पुरी की आलौकिकता 
 
हिन्दूओ के चार पवित्र  धामो मे से एक धाम है श्री  जगन्नाथ पुरी धाम  । आठसो साल पुराना यह मंदिर जिसमे श्री कृष्ण  भगवान जगन्नाथ के रूप मे अपने बङे भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजते है । पुरी के इस मन्दिर मे इन तीनो की पूजा की जाती है । भगवान श्री कृष्ण पूरे ब्रहम्माण्ड  के देव है। जगन्नाथ मंदिर पूरे विश्व मे अपनी अदभुत नक्काशी और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है । भगवान जगन्नाथ और उनके मन्दिर ने अनेक धर्म गुरुओ व उनके अनुयायीयो को अपनी ओर आकर्षित किया है । हर साल यहाँ पर होने वाली रथयात्रा की छटा निराली होती है । इस रथयात्रा मे भगवान श्री कृष्ण के दस अवतारो की पूजा होती है । बलराम, भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा के तीन रथ बनाये जाते है । यह रथ नीम की पवित्र  लकडियो से निर्मित होते है जिसमे किसी तरह की भी कील, कांटे या अन्य धातु का प्रयोग नही किया जाता । हर साल लाखो की संख्या  मे लोग यहाँ इस अदभुद नजारे को देखने के लिए एकत्रित होते है और रथो को खींचते है । इस रथ को खींचने या स्पर्श  मात्र का मौका भी सौभाग्यशालीयों को मिलता है । यह रथयात्रा पूरे नगर से गुजरती है । ऐसी मान्यता है की भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ नगर भ्रमण करते हुए अपनी मौसी के घर रहने जाते है! नौ दिन के बाद इन्हें विधिवत स्नान कराने के बाद और मंत्रोचारण के बीच मन्दिर मे पुनः  स्थापित  किया जाता है । इस अदभुत और आलौकिक आयोजन को देखने वाला स्वयं  को सौभाग्यशाली कह सकता है ।  
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