सोंचों अगर क़ुरबानी या बलि जैसा कोई त्यौहार अब हिन्दुओं में बचा होता तो

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सोंचों अगर क़ुरबानी या बलि जैसा कोई त्यौहार अब हिन्दुओं में बचा होता तो अब तक
पेटा वाले कोहराम मचा रहे होते
प्रदूषण विभाग वाले खून से सनी नालीयों की दुहाई दे रहे होते
विपक्ष में बैठे नेता लोग इसे पिछड़ापन, और गैर असभ्य करार दे रहे होते
कुछ सेक्युलर हिन्दू इसकी सारी कमियां निकाल कर पोस्ट कर रहे होते कि निर्दोष जीव हत्या ना करे, जल बचाये
और मीडिया छाती कूट कर रही होती और कैसे गला रेतने पे मृत्यु होती दिखा रही होती
पर ऐसा कुछ हुआ क्या???
कवि अनूप कुमार नवोदयन
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