सरकार है पस्त, जनता है त्रस्त

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सरकार है पस्त, जनता है त्रस्त  
 
दिल्ली हो या यूपी, राज्य सरकारो और केन्द्र सरकार के बीच के मनमुटाव ने प्रदेश की जनता को पूरी तरह बेबस बना दिया है । सरकारो के इस घमासान मे बेचारी जनता पीस है। देश का भले ही विकास हो रहा हो पर आम जनता बुनियादी सुविधाओ के अभाव मे तङप रही है । महंगाई, बेरोजगारी, दिल्ली यूपी मे बढते अपराध और बेखौफ घूमते अपराधी, रात मे जगह जगह सङको पर  पसरा अँधेरा,  लूटपाट, महिलायो के साथ छेडछाड और दुष्कर्म की बङती घटनाये,  अस्पतालो मे बदइंतजामी ने लोगो को बेहाल कर रखा है । न पर्याप्त डाक्टर है, न दवाईया । दिल्ली का हाल तो बहुत ही  खराब है! सारे काम रूके हुए है और इल्जाम केन्द्र सरकार पर थोपा जा रहा है । पर क्या इल्जाम एक दूसरे पर थोपने से गरीबो का पेट भर जायेगा । उनकी मुश्किले  हल हो जाएगी । सरकार को लोगो की भलाई के काम पर ध्यान देना चाहिए । वरना त्रस्त जनता कभी दोबारा इन मौकापरस्त नेताओ पर विश्वास नहीं करेगी और अपना नेता चुनने मे अपनी इस भूल को नही दोहरायगी।
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