भारत के त्यौहार

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त्यौहार 
 
आज मनुष्य चाँद पर पहुच गया है ! हम विज्ञान का युग में जी रहे है!  विज्ञानं और तकनिकी के क्षेत्र में एक के बाद  महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर रहे है है । जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में नित नए अनुसंधान एवं प्रयोगों के माध्यम से मनुष्य विकास की ओर अग्रसर हुआ है । लकिन इस सब के बादजूद मनुष्य का बौद्‌धिक विकास के साथ-साथ उसमें भावनात्मक विकास भी जरुरी है और इसमें हमारे भारत देश के  त्यौहार , हमारे पर्व सदैव सहभागी रहे हैं । इनकी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही है ! हमारे त्यौहार  करुणा,सरलता, आतिथ्य सत्कार, पास्परिक प्रेम एवं सद्‌भावना जैसे नैतिक गुणों का मनुष्य में विकास करते हैं । इन्हीं नैतिक मूल्यों की अवधारणा से मनुष्य का चारित्रिक अथवा भावनात्मक विकास होता है । अपने परिवार जनों, मित्र जनों के साथ पारम्परिक विधियो से  त्यौहार मनाने से जो खुशियाँ मिलती हैं आज के तनावग्रस्त माहौल में उसका महत्व भी कम नहीं है । भारत को यदि त्यौहारो  का देश कहें तो अनुचित नहीं होगा। इस देश में विभिन्न धर्मों एवं संप्रदायों के लोग निवास करते हैं तथा किसी न किसी धर्म या संप्रदाय से संबद्‌ध त्यौहारो का क्रम यहाँ चलता रहता है। कभी हिंदुओं की दीवाली, होली होती है तो कभी सिक्खों की वैशाखी। कभी मुसलमान की  ईद,  तो कभी ईसाई क्रिसमस के अवसर पर चर्च में प्रार्थना करते दिखाई देते हैं।
भारत के त्यौहार देश की संस्कृति को उजागर करते हैं। ये उत्सव हमारा गौरव हैं। विभिन्न जातियों, भाषाओं, प्रांतों व भिन्न-भिन्न संप्रदायों के लोग मिलजुल कर त्यौहारो  का आन्नद उठाते है!  भारत देश के एकीकरण में  त्यौहार सदैव ही प्रमुख भूमिका निभाते हैं!
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