कला धन और सरकार

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 कला धन और सरकार 
 
काले धन को बाहर निकालने के लिए सरकार हर बार तारीख तय कर देती है, और भूल जाती है । इससे काले धन के स्वामियों को अब  आभास हो गया  है कि भले ही सरकार ने तारीख तय कर दी हो,  पर सरकार इसके लिए न कभी गंभीर थी और न होने की संभावना है ।  सरकार ने तो शायद  ऐसा समझ रखा है जैसे उनके एक बार तारीख तय कर देने पर काले धन के थैले खुद चल कर उनके पास आ जायेगे।  इसी कारण  काले धन वाले भी निफराम बैठे है। इतने सालो मे अब शायद उन्हें  इस खेल मे  मजा आने लगा है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर सरकार को अपनी क्षमता पर भरोसा होता तो  इस तरह धमकी, चेतावनी और बदलती तारीखो की जरूरत नही होती । सत्ता मे आने से पहले से ही  सरकार काले धन वापस लाने का जाप कर रही है! और सरकार बने भी दो साल हो चुके है, पर सरकार अब तक किसी का काला धन तो क्या एक काला बाल भी बांका  नही कर पायी है । तो अब उम्मीद भी क्या की जा सकती है । काले धन को बाहर निकालने के लिए जब तक सरकार कोई सख्त प्रभावी तरीका नही निकालेगी, कुछ नही होने वाला। ऐसे मे सरकार के पास सिवाय धमकाने के कोई चारा है भी नही। अब सरकार की इन गीदङ भपकीयो का काले धन के स्वामियों की सेहत पर कोई असर नही पङता। धमकियो से तो बात बनी नही, शायद सरकार को एक बार खुशामद करके भी प्रयास  कर लेना चाहिए, शायद कुछ बात बन जाए, और पूरा न सही थोडा बहुत काला धन ही बाहर आ जाए! 
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