असहनशिलता

असहनशिलता
असहनशिलता 
 
हमारे बीच असहनशिलता दिन प्रतिदिन बङती जा रही है । आज छोटे बच्चो से लेकर बङे तक असहनशिलता के शिकार हो चुके है । किसी को किसी की छोटी सी बात भी सहन नही होती है । बच्चो को माता पिता की। पति पत्नी को एक दूसरे की। कर्मचारी को मालिक की। जरा जरा से बच्चे माता पिता के डाट देने या थोडा सा सख्ती करने पर या उन्हे गलत रास्ते पर चलने से रोकने पर आत्महत्या  जैसा बङा कदम उठा लेते है । यही हाल आजकल के युवा वर्ग का भी है । इस आयु मे तो सहनशीलता वैसे भी कम ही होती है! और आज के परिदृश्य मे तो यह ज्यादा ही बढ रहा है । जरा सी बात पर युवा वर्ग बिना सोचे समझे खतरनाक कदम उठाने को तैयार हो जाते है । कई बार इससे उनका सम्पूर्ण जीवन नष्ट हो जाता है । असहनशिलता का यही विकराल रूप वैवाहिक जीवन पर भी नकारात्मक असर डाल रहा है । पति पत्नी मे आपस मे सहनशीलता का स्तर  गिर रहा है । आधुनिक युग मे अधिकांशत दोनो पङे लिखे और आत्मनिर्भर बन चुके है । विवाह के बाद छोटे मोटे मतभेदो मे सहनशीलता की कमी के चलते दोनो पक्षो मे से कोई भी झुकने को तैयार नही होता! और बढते बढते मामला समबन्ध विच्छेद तक पहुंच जाता है । घर से बाहर भी देखे तो आजकल लोग छोटी सी बात पर एक दुसरे की हत्या तक कर देते है। अखबार ऐसी ही खबरो से भरा नजर आता है । यह स्तिथि  समाज के बदलते परिवेश की ओर इशारा करती है । और इसमे किस का दोष समझा जाए यह भी कह पाना मुश्किल है । 
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