ताकि गुजारा भत्ता के नाम पर न हो भविष्य के साथ खिलवाड !

गुजारा भत्ता के revoiceindia
ताकि गुजारा भत्ता के नाम पर न हो भविष्य के साथ खिलवाड ! 
 
एक महिला अपने पति पर आरोप लगाती है कि उसके तीन बच्चो की पढाई लिखाई पति के गुजारा भत्ता न देने से रूक गई । मगर तहकीकात मे पता चलता है कि महिला का पति दसवी पास है! और छोटी सी दुकान चलाता है । जबकि महिला स्नातक है। इस पर कोर्ट ने महिला को पति से मिलने वाले गुजारे भत्ते पर रोक लगा दी है! और महिला से कहा कि वह पढी लिखी है, खुद कमाकर बच्चो का पालन पोषण करे। अदालत ने महिला पर सख्ती करते हुए यह भी कहा कि केवल पति को सबक सिखाने के लिए और उससे गुजारा भत्ता लेने के लिए उसने अपने तीनो बच्चो की पढाई रूकवा दी, जबकि वो खुद पढी लिखी है । उसने आपसी विवाद मे बच्चो की जिन्दगी के साथ जानबूझकर खिलवाड किया, जबकि वो चाहती तो बच्चो के भविष्य के लिए नौकरी की तलाश करती। इसलिए अदालत ने महिला के गुजारा भत्ता पाने के अधिकार को समाप्त कर दिया और जीवन यापन के लिए खुद प्रयास करने को कहा । हालांकि निचली अदालत ने पिता की कमाई के हिसाब से बच्चो के गुजर बसर के  लिए हर माह दो हजार रुपये देने का आदेश लागू कर रखा है । इसके अलावा अदालत ने महिला को भी अपनी तरफ से प्रयास करने को कहा । अदालत के इस फैसले से दूसरो को भी सबक मिलेगा ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड न  हो पाये।
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