कश्मीर समस्या पर कांग्रेस का विरोधाभासी रुख

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कश्मीर समस्या पर कांग्रेस का विरोधाभासी रुख  
 
कांग्रेस, कश्मीर समस्या पर ना सीधी चलती है और ना ही उल्टी। उसका रुख पूरी तरह विरोधाभासी प्रतीत होता है! पूरी दुनिया को पता है  कि कश्मीर समस्या के जन्मदाता कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु थे! कश्मीर में हिंसा कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस की साझा सरकार के समय भी हुई थी!  लेकिन उस वक्त उन्होंने खुद पैलेट गन चलाकर इन हिंसा फ़ैलाने वालो को खामोश कर दिया! जब यही हिंसा मोदी सरकार के समय हुई तो वे पैलेट गन पर ऐतराज कर रहे हैं! इसके अलावा कांग्रेसी नेता विरोधाभासी बयान दे रहे हैं!  कभी वे कहते हैं कि पूरा कश्मीर परेशान है, पूरा कश्मीर सड़कों पर है, पूरा कश्मीर पत्थरबाजी कर रहा है!  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कश्मीर मुद्दे से निपटने के लिए ‘एकता’ और ‘ममता’ शब्द पर कांग्रेसी नेता  मजाक उड़ा रहे है !  प्रधानमंत्री मोदी कड़े एक्शन की बात करते हैं तो उन्हें आपत्ति होती है! अगर मोदी एकता और ममता की बात करते हैं तो उन्हें आपत्ति होती है!  इन कांग्रेसियो का करैक्टर पूरा का पूरा डाउटफुल लग रहा है ! जब मोदी कहते हैं कि हमें कश्मीरियों के साथ एकता और ममता के साथ काम लेना होगा, उन्हें अपना समझना होगा और उनकी समस्या को अपनी समस्या समझना होगा तो कांग्रेसी नेता बयान देते है कि  मोदी कविता कर रहे हैं, कविता से कश्मीर की समस्या हल नहीं होगी। दरअसल कांग्रेसी  नहीं चाहते कि कश्मीर की समस्या ख़त्म हो, कश्मीर में शांति हो और इस शांति का क्रेडिट मोदी सरकार को जाए!  इसलिए वे अपने बयानों से उपद्रवी और पत्थरबाजों को उकसाने वाला काम करते हैं, विरोधाभासी बाते  करते है! कांग्रेस की इस  दो तरफा नीति का उसे यूपी चुनावों में खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है ! 
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