अमरनाथ धाम की अमरत्व कथा

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अमरनाथ धाम की अमरत्व कथा
 
एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से अमर होने के रहस्य पूछे! पत्नीहठ के कारण महादेव को  कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पडे़। पौराणिक मान्याताओं के अनुसार, अमरनाथ की गुफा ही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने पार्वती को अमर होने के गुप्त रहस्य बतलाए थे, उस दौरान उन ‘दो ज्योतियों’ के अलवा तीसरा वहां कोर्इ प्राणी नहीं था । महादेव ने सबसे पहले अपने  पांचों तत्वों नंदी, नाग, गंगा  गनपति और कार्तिकेय को स्वंय से अलग किया। इसके पश्चात् महादेव ने देवी पार्वती संग एक गुफा में  प्रवेश किया। फिर महादेव ने जीवन के गूढ़ रहस्य की कथा शुरू कर दी। कहा जाता है कि कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गर्इ, वह सो गर्इं और महादेव को यह पता नहीं चला, वह कथा सुनाते रहे। यह कथा  दो सफेद कबूतर सुन रहे थे और बीच-बीच में  अपनी स्वाभाविक गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा कि पार्वती कथा सुन रही हैं और बीच-बीच में हुंकार भर रही हैं। दोनों कबूतर सुनते रहे, कथा समाप्त होने पर महादेव का ध्यान पार्वती पर गया तो उन्हें पता चला कि वे सो रही हैं। तब  उनकी दृष्टि दो कबूतरों पर पड़ी तो महादेव को क्रोध आ गया। कबूतर का जोड़ा उनकी शरण में आ गया और बोला, भगवन् हमने आपसे अमरकथा सुनी है। यदि आप हमें मार देंगे तो यह कथा झूठी हो जाएगी, हमें पथ प्रदान करें। इस पर महादेव ने उन्हें वर दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव व पार्वती के प्रतीक के रूप में निवास करोगे। अंतत: कबूतर का यह जोड़ा अमर हो गया और यह गुफा अमरकथा की साक्षी हो गर्इ। इस तरह इस स्थान का नाम अमरनाथ पड़ा। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं।
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